A Legacy of Melodious Grace
Born on 17 May 1951 in Jetpur, Gujarat, Padma Bhushan Pankaj Udhas entered the world with music already whispering through his soul. Inspired at the tender age of five by Bharat Ratna Lata Mangeshkar Ji, he went on to transform ghazal into a global and accessible art form.
From his first ghazal album Aahat in 1980 to the immortal success of Chitthi Aayi Hai in 1986, his velvet voice gave ghazal a place in homes, hearts and memories across generations. With over 50 albums and more than 1,000 songs, he carried poetry, melody and emotion beyond elite mehfils and into the soul of the masses.
Honoured with the Padma Shri in 2006 and the Padma Bhushan in 2025 posthumously, he remains a symbol of grace, humility, music and service. Through Khazana – A Festival of Ghazals, PATUT and CPAA, his work supported thalassemia and cancer causes for decades. His music continues to echo as a universal language of hope, healing and humanity.
मख़मली आवाज़, अमर विरासत
17 मई 1951 को जेतपुर, गुजरात में जन्मे पद्म भूषण पंकज उधास ने अपनी मख़मली आवाज़ से ग़ज़ल को जन-जन तक पहुँचाया। पाँच वर्ष की आयु में भारत रत्न लता मंगेशकर जी की दिव्य आवाज़ ने उन्हें संगीत के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
1980 में उनके पहले ग़ज़ल एल्बम आहट से शुरू हुई यात्रा 1986 में चिट्ठी आई है के माध्यम से अमर हो गई। 50 से अधिक एल्बमों और 1,000 से अधिक गीतों के माध्यम से उन्होंने ग़ज़ल को चुनिंदा महफ़िलों से निकालकर करोड़ों दिलों तक पहुँचाया।
पद्म श्री और मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित पंकज उधास संगीत, सौम्यता, सेवा और मानवता के प्रतीक रहे। ख़ज़ाना, PATUT और CPAA के माध्यम से उन्होंने थैलेसीमिया और कैंसर से जुड़े मानवीय कार्यों को दशकों तक सहयोग दिया।
मखमली आवाज, चिरंतन वारसा
17 मे 1951 रोजी जेतपूर, गुजरात येथे जन्मलेले पद्मभूषण पंकज उधास यांनी आपल्या मखमली आवाजातून गझलला घराघरांत पोहोचवले. बालवयात भारतरत्न लता मंगेशकर यांच्या स्वरांनी त्यांना संगीताच्या मार्गावर प्रेरित केले.
आहट पासून सुरू झालेली त्यांची सांगीतिक यात्रा चिट्ठी आई है या अमर गीताने अजरामर झाली. 50 हून अधिक अल्बम आणि 1,000 हून अधिक गीतांद्वारे त्यांनी गझलला निवडक मैफिलींपासून जनमानसापर्यंत नेले.
पद्मश्री आणि मरणोत्तर पद्मभूषण सन्मानांनी गौरवले गेलेले पंकज उधास हे संगीत, विनम्रता आणि मानवतेचे प्रतीक राहिले. ख़ज़ाना, PATUT आणि CPAA च्या माध्यमातून त्यांनी थॅलेसीमिया आणि कॅन्सर रुग्णांसाठी कार्य करणाऱ्या उपक्रमांना अनेक दशकांपर्यंत हातभार लावला.